रुको सुनो, मेरी
बात समझो,
क्या जल्दी है
यूं भागे जा रहे हो?
एक साथ करोड़ों
लोगो की, उम्र छीन रहे हो!
तुम हो कौन? किसी
सरफिरे ने तुम्हे मापने के लिए,
टिक..टिक..टिक...लगा
दी...घडी बना दी,
और तुमसे सुर
मिला कर घोषणा कर दी,
की तुम वक़्त
हो... नहीं रुकते!!!
तुम पागल हो, तुम
कायर हो! देखो वहां,
धरती के जानवर,
उसे इंसान कहते है!
मेरी बात सुनो...उसके
अन्दर झाँक कर देखो,
दिन में उसका
शरीर भागता है,
रात में मन
भागता है!
सिन्दूरी सूरज, जानवरों
की झोली में डाल दिया?
उसकी छत से,
सिर्फ रात और दिन दिखता है?
मैं कहता हूँ तुम
जनरल डायर हो,
बिना सोचे समझे
निहत्थो पर गोलियां चला रहे हो!
देखो, उसे
अपने हिसाब सी जीने दो,
अपना वक़्त तय
करने दो, घडी की सुइयां बनाने दो!
तुम्हारी रफ़्तार से नहीं, अपनी रफ़्तार से,
उसे अब, पचास
बरसों का उजाला चाहिए,
कायरता से आँखें
मूंदे बिना, सूरज चाहिए!
रुक जाओ!! मैं
कहता हूँ तुम महान हो,
सबसे निडर और
दयावान हो!
सुनो, रात और दिन
बराबर नहीं है उसके पास
उसने अपना जीवन, एक
दौड़ में गुजारा हैं,
पैदा होकर, चैन
से जीने के लिए बहुत भागा है!
मासूम है, जानता
नहीं, की वक़्त क्या है!
अपनी कलाई पर,
घडी बांधने का मतलब क्या है?
बैटरी ख़तम हो गई,
टिक टिक टिक बंद हो गया,
घडी के शीशे पर टकराया
हम दोनों का चेहरा,
उसने कहा, सुनो..
मैं रुकता हूँ ठहरता हूँ
तुम्हे मालूम
नहीं, मैं भी डरता हूँ!
तुम बल्ब जला कर
रौशनी करते हो,
लेकिन मैं अँधेरे
में भागता हूँ,
अकेले बिना रुके,
तुम सब को जोड़ कर रखता हूँ!
मेरी दुनिया में,
हर कलाई पर एक घडी है,
सिर्फ एक सुई है,
जब जी चाहे आगे बढ़ा लो,
जब मर्जी हो तो
पीछे मोड़ दो!
हर चीज़ अमर होती है,
बार बार देखने से मन उचटता है!
इतिहास, वर्तमान,
भविष्य गोल-गोल घूमता है!
लेकिन वहां तुम्हारा
यह पागलपन नहीं होगा!
सब अपनी मर्जी से
जियेंगे, कोई अपना नहीं होगा!
भागा दौड़ा, घडी
में बैटरी डलवाई,
टिक टिक टिक की
आवाज़ से आराम मिला!
चमकते शीशे पर साथ निभाने वाला,
साथ भागने वाला
एक दोस्त मिला!
अपने मर्जी से अपना
पागलपन करने,
टिक-टिक को अपनी कलाई
पर बांधा, और आगे बढ़ गया!