Monday, October 20, 2014



ईमान का बटुआ

लो भैया ईमान का बटुआ,खाली-गन्दा, पर, काम का बटुआ

तेरा हो तो सोने जैसा, उसका हो तो खोटी चवन्नी...
काम लगे तो गिरवी रखना, दाम लगे, मुहमांगी कीमत...
सोना-चांदी सदियों पहले, गाँधी का अब नाम है बटुआ...
लो भैया ईमान का बटुआ,खाली-गन्दा, पर, काम का बटुआ

पन्हेरी के पान का चुना, टपके मुह से मिसरी मीठी...
अनमोल बड़ा इंसान का चुना, छन-छन उबले पानी जैसा, 
घुट गई बोली, गूंगी चीखे, चमड़े का ही दाम है बटुआ...
लो भैया ईमान का बटुआ,खाली-गन्दा, पर, काम का बटुआ

जूता चमके, फूटी एड़ी, देसी बढ़िया टोपी, उजली धोती...
बाबा के कमरे से अपने, खोज-खोज के भरना झोली...
 गुल्लक फोड के इसमें ठुसो, बहुत बड़ा आराम है बटुआ...
लो भैया ईमान का बटुआ,खाली-गन्दा, पर, काम का बटुआ


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