Tuesday, August 7, 2018

टिक-टिक-टिक



रुको सुनो, मेरी बात समझो,
क्या जल्दी है यूं भागे जा रहे हो?
एक साथ करोड़ों लोगो की, उम्र छीन रहे हो!
तुम हो कौन? किसी सरफिरे ने तुम्हे मापने के लिए,
टिक..टिक..टिक...लगा दी...घडी बना दी,
और तुमसे सुर मिला कर घोषणा कर दी,
की तुम वक़्त हो... नहीं रुकते!!!

तुम पागल हो, तुम कायर हो! देखो वहां,
धरती के जानवर, उसे इंसान कहते है!
मेरी बात सुनो...उसके अन्दर झाँक कर देखो,
दिन में उसका शरीर भागता है,
रात में मन भागता है!
सिन्दूरी सूरज, जानवरों की झोली में डाल दिया?
उसकी छत से, सिर्फ रात और दिन दिखता है?

मैं कहता हूँ तुम जनरल डायर हो,
बिना सोचे समझे निहत्थो पर गोलियां चला रहे हो!
देखो, उसे अपने हिसाब सी जीने दो,
अपना वक़्त तय करने दो, घडी की सुइयां बनाने दो!
तुम्हारी रफ़्तार से नहीं, अपनी रफ़्तार से, 
उसे अब, पचास बरसों का उजाला चाहिए,
कायरता से आँखें मूंदे बिना, सूरज चाहिए!

रुक जाओ!! मैं कहता हूँ तुम महान हो,
सबसे निडर और दयावान हो!
सुनो, रात और दिन बराबर नहीं है उसके पास
उसने अपना जीवन, एक दौड़ में गुजारा हैं,
पैदा होकर, चैन से जीने के लिए बहुत भागा है!
मासूम है, जानता नहीं, की वक़्त क्या है!
अपनी कलाई पर, घडी बांधने का मतलब क्या है?

बैटरी ख़तम हो गई, टिक टिक टिक बंद हो गया,
घडी के शीशे पर टकराया हम दोनों का चेहरा,
उसने कहा, सुनो.. मैं रुकता हूँ ठहरता हूँ
तुम्हे मालूम नहीं, मैं भी डरता हूँ!
तुम बल्ब जला कर रौशनी करते हो,
लेकिन मैं अँधेरे में भागता हूँ,
अकेले बिना रुके, तुम सब को जोड़ कर रखता हूँ!

मेरी दुनिया में, हर कलाई पर एक घडी है,
सिर्फ एक सुई है, जब जी चाहे आगे बढ़ा लो,
जब मर्जी हो तो पीछे मोड़ दो!
हर चीज़ अमर होती है, बार बार देखने से मन उचटता है!
इतिहास, वर्तमान, भविष्य गोल-गोल घूमता है!
लेकिन वहां तुम्हारा यह पागलपन नहीं होगा!
सब अपनी मर्जी से जियेंगे, कोई अपना नहीं होगा!

भागा दौड़ा, घडी में बैटरी डलवाई,
टिक टिक टिक की आवाज़ से आराम मिला!
चमकते शीशे पर साथ निभाने वाला,
साथ भागने वाला एक दोस्त मिला!
अपने मर्जी से अपना पागलपन करने,
टिक-टिक को अपनी कलाई पर बांधा, और आगे बढ़ गया!

Monday, July 23, 2018

इश्क



इश्क, नाई का उस्तरा नहीं, जो मुझे काट दे,
मेरी गर्दन पर लटका रहे और हमे बाँट दे!

इश्क, फौजदारी का मुकदमा है,
मिलते रहेंगे, गुर्राते रहेंगे,
नज़र मिला कर शर्माते रहेंगे!
भरी अदालत में लगायेंगे इल्ज़ाम बेशक,
अकेले याद करते रहेंगे, याद आते रहेंगे!

इश्क ताबूत नहीं, जो हमें कैद कर दे,
कोई देख ना पाए, उस पर मिटटी उढेल दे!

इश्क, घाट का एक पुराना पत्थर है
तुम्हारे कपडे भी आयेंगे, मेरे कपडे भी आयेंगे,
साथ पटके जायेंगे, साथ मरोड़े जायेंगे!
लेकर धोबी जायेगा, इश्क के किस्से घर तक,
हमारे कपडे भी मुस्करायेंगे, तुम्हारे कपडे भी मुस्करायेंगे!

इश्क, गुब्बारा नहीं, जो उड़े और फूट जाए,
हाथ की रस्सी छूटे और, दिल टूट जाए!

इश्क एक सितारा है,
उसे तुम भी देखोगे, हम भी देखेंगे,
कुछ तुम भी मांगोगे, कुछ हम भी मांगेगे!
आँख बंद कर, वही बात तुम हवा से कह देना,
हम अपने किस्से में, वही कहानी कह देंगे!



Tuesday, March 27, 2018

फूंकमार चूरन

फूंकमार चूरन
                          आशुतोष तिवारी
फूंकमार चूरन... फूंकमार चूरन... फूंकमार चूरन...
आज का हाईलाइट है, दिल्ली का मौसम टाइट है!
अन्ना चार्टेड प्लेन से आये है, नवरात्रि का ऑफर लाये हैं,
कजरी के साथ डिबिया फ्री, कजरी के साथ डिबिया फ्री!!!

हम सब के गुरु है, फिर से शुरू हैं,
बहुत बड़े दुखिया हैं, बेरोजगारों के मुखिया है,
बाकी को कोई जानता नहीं, और इनको कोइ मानता नहीं!
गजब की सरकार है, बच्चा से बुड्डा तक बेरोजगार है,
पेंशन हम देते नहीं, टेंशन हम लेते नहीं!
जो मिल जाता है, फ़रिया लेते हैं, नहीं मिलने वालों को गरिया देते है!
फूंकमार चूरन... फूंकमार चूरन... फूंकमार चूरन

राजनीति में सक्सेसफुल बहाली की गारंटी है, घर में साली और आंटी है!
साली को घरवाली बनाना चाहता हूँ, आंटी को घर से निकालना चाहता हूँ!
लेकिन, दोनों मिल कर बीबी के कान भरती है, तीनो सुबह शाम धुनती है!
पप्पू-नितीश सी हालत है, जिधर जाओ आफत है!
पेपर पर पूरा राज्य, हंड्रेड परसेंट ड्राई है!
रात में, दारू की दुल्हन, चिकन फ्राई है!
फूंकमार चूरन... फूंकमार चूरन... फूंकमार चूरन

बुड्ढो ने घसीटा है, रोड पर पीटा है
दांत दो गायब है, दुनिया अजायब है!
ना किसी को ममता, ना किसी को माया
माटी की दुनिया, माटी की काया!
५० के कुंवारे है, किस्मत के मारे हैं,
मिल जाता है, तो खा लेते हैं, नहीं तो रायता फैला देते हैं!
फूंकमार चूरन... फूंकमार चूरन... फूंकमार चूरन

बेटा जब धमकाता है, उसको समझाता हूँ, कान में बताता हूँ,
टेक्निकल हुनर सिखाऊंगा, ऑनलाइन पकौडा तलवाऊंगा!
खाता खुल गया है, आधार लिंक हो गया है,
डिजिटल रोटी का डिजाईन बनाया जा रहा है,
चार रोटी तेरे खाते में, चार रोटी मेरे खाते में! खायेंगे और प्रभु का गुण गायेंगे!
फूंकमार चूरन... फूंकमार चूरन... फूंकमार चूरन

कोई कुछ समझता नहीं, ना हाल, ना मेरी बात!
बताइए? भलाई का ज़माना नहीं, जेब में चार आना नहीं!
जिसको देखो दुखी है, सारी दुनिया भूखी है!
रोटी, किसी की डकार है, किसी की पुकार है!
ईमान से कहता हूँ, चूरन नहीं चीनी है, बीबी से छिनी है!
मजबूरी का फंदा है, पुश्तैनी धंधा है,
अमीरों की पालकी, गरीबों का कन्धा है!
फूंकमार चूरन... फूंकमार चूरन... फूंकमार चूरन... फूंकमार चूरन... फूंकमार चूरन...