Monday, July 23, 2018

इश्क



इश्क, नाई का उस्तरा नहीं, जो मुझे काट दे,
मेरी गर्दन पर लटका रहे और हमे बाँट दे!

इश्क, फौजदारी का मुकदमा है,
मिलते रहेंगे, गुर्राते रहेंगे,
नज़र मिला कर शर्माते रहेंगे!
भरी अदालत में लगायेंगे इल्ज़ाम बेशक,
अकेले याद करते रहेंगे, याद आते रहेंगे!

इश्क ताबूत नहीं, जो हमें कैद कर दे,
कोई देख ना पाए, उस पर मिटटी उढेल दे!

इश्क, घाट का एक पुराना पत्थर है
तुम्हारे कपडे भी आयेंगे, मेरे कपडे भी आयेंगे,
साथ पटके जायेंगे, साथ मरोड़े जायेंगे!
लेकर धोबी जायेगा, इश्क के किस्से घर तक,
हमारे कपडे भी मुस्करायेंगे, तुम्हारे कपडे भी मुस्करायेंगे!

इश्क, गुब्बारा नहीं, जो उड़े और फूट जाए,
हाथ की रस्सी छूटे और, दिल टूट जाए!

इश्क एक सितारा है,
उसे तुम भी देखोगे, हम भी देखेंगे,
कुछ तुम भी मांगोगे, कुछ हम भी मांगेगे!
आँख बंद कर, वही बात तुम हवा से कह देना,
हम अपने किस्से में, वही कहानी कह देंगे!



No comments:

Post a Comment